असफलताओं के एक साल के बाद, एक नया दशक धूम्रपान को खत्म करने की लड़ाई में नई उम्मीद लाता है – धूम्रपान-मुक्त दुनिया फाउंडेशन (एफएसएफडब्ल्यू)

असफलताओं के एक साल के बाद, एक नया दशक धूम्रपान को खत्म करने की लड़ाई में नई उम्मीद लाता है

2019 की शुरुआत अच्छी रही, इस एहसास के साथ कि शायद धूम्रपान का सूर्य अस्त होने को है। हालांकि आशावाद का यह माहौल अल्पकालिक था। प्रगति के बजाय, 2019 असफलताओं, फूट, और वैश्विक स्वास्थ्य में सुधार के अवसरों की बर्बादी की एक शृंखला लेकर आया। फिर भी, मुझे उम्मीद है कि 2020 अलग हो सकता है।

पिछले एक साल में, आशा और विवाद का स्रोत एक ही था: तम्बाकू के नुकसान कम करने (टीएचआर) के क्षेत्र में नवाचार। टीएचआर उत्पाद (जिन्हें ऐसे उत्पादों के रूप में परिभाषित किया जाता है जो निकोटीन को दहन के उत्पादों या कैंसर के स्रोतों से अलग कर देते हैं) निकोटीन गम और पैच के रूप में कई दशकों से मौजूद हैं। हाल ही में, ई-सिगरेट को शामिल करने के लिए इस श्रेणी में विस्तार किया गया है, जिसके बारे में शोध बताता है कि वह पिछले टीएचआर हस्तक्षेपों की तुलना में कहीं अधिक सफल हो सकती है। लेकिन, जैसे ही सार्वजनिक स्वास्थ्य समुदाय ई-सिगरेट के फायदे पहचानने लगा था कि तभी, एक तथाकथित "वैपिंग संकट" ने उनके नाम को कलंकित कर दिया।

यह संकट पूरी तरह से गढ़ा हुआ नहीं था। लोग बीमार हुए; और उनमें से कुछ, दुखद रूप से, अपनी जान गंवा बैठे। अब तक, इन बीमारियों के अधिकांश में काले बाज़ार के टीएचसी युक्त उत्पादों में विटामिन ई एसीटेट के होने का पता चला है (यानि, निकोटीन नहीं)। पर फिर भी, मीडिया द्वारा बढ़ा-चढ़ा कर की गई कवरेज के कारण सभी वैपिंग यंत्रों – जिनमें धूम्रपान करने वालों का जीवन बचा सकने वाले टीएचआर उत्पाद शामिल हैं – को एक ही कतार में खड़ा करके उन पर शैतान होने का ठप्पा लगा दिया गया।

संदेहास्पद विज्ञान, चिंताग्रस्त अभिभावक, और बच्चों के भावी स्वास्थ्य की सैद्धांतिक चिंताओं को धूम्रपान करने वालों की अविलंब आवश्यकताओं से ऊपर रखने वाली नैतिकता, इन सब ने मिलकर टीएचआर के बारे में नकारात्मक आख्यानों को जोर-जोर से उछाला है। इस किस्म की डर की सौदागरी इस क्षेत्र में हुई जबर्दस्त प्रगति का विरोध करती है और इसमें पूर्व में धूम्रपान करने वालों को वापस उन्हीं घातक दहन उत्पादों के पास भेजने की क्षमता है।

इसके अलावा, टीएचआर विवाद ने उन पक्षों को अलग-अलग किनारों पर ले जाकर पटक दिया है जिन्हें एक ही किनारे पर होना चाहिए। वैज्ञानिक, चिकित्सक, सार्वजनिक स्वास्थ्य संगठन और नियामक इस बात से सहमत हैं कि धूम्रपान एक सामाजिक संकट है जिसे समाप्त किया जाना चाहिए। फिर भी, इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए सहयोग करने के बजाय, इन समूहों ने टीएचआर की खूबियों या कमियों पर बहस करते हुए अनगिनत घंटे बिता दिए हैं। आज जब हम नए दशक का स्वागत कर रहे हैं, तो यह महत्वपूर्ण है कि हम इस तरह की अंदरूनी कलह से बचें और इसके बजाय उन लक्ष्यों पर ध्यान केंद्रित करें जो तम्बाकू विरोधी आंदोलन को एकजुट करते हैं।

नया साल, नए संकल्प

2020 में हमस्वास्थ्य पर धूम्रपान के दुष्परिणाम" पर विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के पहले संकल्प की 50वीं वर्षगांठ मना रहे हैं। 1970 में डब्ल्यूएचओ के कार्यकारी बोर्ड में रखे गए इस प्रस्ताव ने तम्बाकू के उपयोग से जुड़े गंभीर परिणामों को उजागर किया और जल्द कदम उठाने का आह्वान किया, जिनमें शामिल हैं: आगे की सिफारिशों को विकसित करने के लिए एक विशेषज्ञ समूह का गठन; और तम्बाकू उत्पादक क्षेत्रों में फसल के विकल्पों का अध्ययन। इस आह्वान से कई बैठकें हुईं और प्रस्ताव आए लेकिन ठोस परिवर्तन बहुत कम हुआ।

1970 से हमने अधिकांश विकसित दुनिया में धूम्रपान में वृद्धि और उसकी धीमी गिरावट देखी है। फिर भी, चीन, भारत और इंडोनेशिया सहित सबसे अधिक आबादी वाले देशों में धूम्रपान की दर अभी-भी खतरनाक रूप से अधिक है। 2020 में, हमें न केवल यह स्वीकार करना होगा कि धूम्रपान एक दबाव डालने वाले वैश्विक स्वास्थ्य खतरे के रूप में बना हुआ है, बल्कि हमें इस ख़तरे के विकसित होने के तरीकों का तोड़ निकालने की हमारी युक्तियों को अनुकूलित भी करना होगा।

दुनिया के अधिकांश धूम्रपान करने वाले अब निम्न- और मध्यम-आय वाले देशों में रहते हैं। इन देशों में परिवर्तन करने के लिए उनकी सांस्कृतिक, नियामक और आर्थिक बारीकियों का ज्ञान और उनके प्रति संवेदनशीलता आवश्यक है। धूम्रपान महामारी का आकार न केवल भूगोल के संबंध में विकसित हुआ है, बल्कि लिंग के संबंध में भी। 50 साल पहले, महिलाएं पुरुषों की तुलना में बहुत कम धूम्रपान करती थीं; आज, वे बराबर आ रही हैं। जहां एक ओर पुरुषों के बीच वैश्विक धूम्रपान दर घट रही है, वहीं दूसरी ओर महिलाओं के बीच यह दर अभी-भी संभवतः चरम पर नहीं पहुंची है। नतीजतन, अब ऐसे देश हैं जहां फेफड़े के कैंसर से मरने वाली महिलाओं की संख्या, स्तन कैंसर से मरने वाली महिलाओं की संख्या से अधिक है।

अपनी लंबी उम्र के चलते इस धूम्रपान महामारी ने, दुर्भाग्य से, इसके विनाशकारी प्रभावों को रद्दी अख़बार बना दिया है। अतः आश्चर्य नहीं कि प्रत्येक वर्ष धूम्रपान से मारे जाने वाले अस्सी लाख लोगों की तुलना में वैपिंग का उन्माद अधिक ध्यान आकर्षित करता है। ई-सिगरेट, दहनशील उत्पादों की तुलना में बहुत कम हानिकारक हैं; लेकिन वे नए हैं, और इसलिए खलबली मचाने के लिए बिल्कुल सही बलि के पात्र हैं। इस गुमराह पागलपन में और इजाफा करने की बजाय, इस क्षेत्र के विशेषज्ञों को नए नजरिए और साहसिक विचारों के साथ धूम्रपान से निपटने के लिए मिलकर काम करना चाहिए।

मुझे आशा है कि हम 50 साल पहले धूम्रपान को डब्ल्यूएचओ के एजेंडे में लाने के लिए लड़ने वालों के जुनून पर फिर से ध्यान देंगे, और हमारा ध्यान तम्बाकू से होने वाली मौतों की रोकथाम पर केंद्रित रखेंगे। और 2020 में हमारे पास यही करने का अवसर है। इस अक्तूबर में, पक्षों के सम्मेलन के नौवें सत्र में तम्बाकू नियंत्रण पर फ्रेमवर्क सम्मेलन में वर्णित लक्ष्यों की समीक्षा की जाएगी। नीदरलैंड में होने वाला यह आयोजन तम्बाकू नियंत्रण की वर्तमान पद्धतियों में मौजूद खामियों पर ध्यान देने, और इस दशकों लंबी लड़ाई में नई ऊर्जा का संचार करने का अवसर दे रहा है।

इस दिशा में, ऐसे कई महत्वपूर्ण कदम हैं जिन्हें उठाकर हम वास्तविक परिवर्तन की शुरूआत कर सकते हैं। सबसे पहले तो, हमें धूम्रपान को समाप्त करने के लिए समर्पित विभिन्न भागीदारों के गठबंधन का निर्माण करना चाहिए। मॉरवेन संवादों के भावार्थ को ध्यान में रखते हुए, इस गठबंधन में भाग लेने के लिए एकमात्र आवश्यकता ऐसे ठोस कार्यों के लिए प्रतिबद्धता होगी जो धूम्रपान से होने वाली मौतों में कमी लाते हैं। दूसरे, वास्तविक प्रगति के लिए यह आवश्यक है कि हम तम्बाकू के नुकसान को कम करने और रोकने के हस्तक्षेपों की पूरी शृंखला को अपनाएं, और यह कि हम इस रुख से अनुरूपता रखने वाले विनियमों को लागू करें।

तीसरे, भविष्य के कदमों में उन समूहों की आवश्यकताओं पर ध्यान दिया जाना चाहिए जिनमें धूम्रपान की दरें विषमतापूर्वक अधिक बनी हुई हैं। इनमें नैदानिक अवसाद से लेकर तपेदिक जैसी तक सह-रुग्ण स्थितियों से ग्रस्त लोग शामिल हैं। सामाजिक कारक भी तम्बाकू के उपयोग के जोखिम को बढ़ा सकते हैं और इसलिए उन पर भी ध्यान देना चाहिए। उदाहरण के लिए, मूल निवासियों और एलजीबीटीक्यू समुदाय सहित हाशिए के समूहों में धूम्रपान की दर अधिक है; हमें इस परिघटना को बेहतर ढंग से समझने और विशेष रूप से इन्हीं समूहों के मुताबिक समाधान तैयार करने के लिए कार्य करना चाहिए।

और अंत में, यह महत्वपूर्ण है कि हम ऐसी नीतियां और हस्तक्षेप विकसित करें जो उन देशों में सबसे गरीब समूहों तक पहुंचें जहां की धूम्रपान की दर में कई दशकों से बहुत कम बदलाव हुआ है। ये समुदाय बहुत लंबे समय से उपेक्षित हैं और इन्हें हमारा तत्काल ध्यान मिलना चाहिए।

हमारे पास करने के लिए काम है।

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