तम्बाकू उत्पादन और व्यापार के वैश्विक रुझान - धूम्रपान-मुक्त दुनिया फाउंडेशन

तम्बाकू उत्पादन और व्यापार के वैश्विक रुझान

पिछले दो दशकों के दौरान, तम्बाकू के उत्पादन और व्यापार के वैश्विक पैटर्नों में नाटकीय विस्थापन हुआ है। इन विस्थापनों को विस्तार से समझने, उनके चालक बलों को स्पष्ट करने, और तम्बाकू नियंत्रण के लिए उनके निहितार्थों को समझने में उल्लेखनीय मात्रा में शोध हुआ है। हालांकि शोध का एक क्षेत्र अपेक्षाकृत अनछुआ रह गया है, और वह यह है कि कैसे इन बदलावों ने तम्बाकू के वैश्विक प्रवाह को, और तम्बाकू नियंत्रण के संबंधित निहितार्थों को बदला है। फ़ाउंडेशन की तम्बाकू उत्पादन और व्यापार के वैश्विक रुझान की रिपोर्ट तम्बाकू के वैश्विक प्रवाह को, और धूम्रपान-मुक्त दुनिया बनाने की हमारी कोशिशों के लिए इसका क्या मतलब हो सकता है इसे, समझने की दिशा में हमारा पहला कदम है।

यदि वैश्विक तम्बाकू उत्पादन की मात्रा की बात करें, तो रिपोर्ट से पता चलता है कि बहुत थोड़ा बदलाव हुआ है, कम-से-कम पहली नज़र में तो यही लगता है। पिछले दो दशकों में उत्पादित तम्बाकू की मात्रा कई शिखरों और गर्तों से गुजरी है, पर उत्पादित हो रही मात्रा में कोई स्पष्ट या समझ में आने योग्य रुझान नहीं है। हालांकि, अधिक विस्तृत विश्लेषण से यह स्पष्ट हो जाता है कि तम्बाकू का उत्पादन का अधिकांश भाग यूरोप और उत्तरी अमेरिका के उच्च-आय देशों से अफ़्रीका, एशिया, और दक्षिणी अमेरिका के निम्न- और मध्यम-आय देशों को विस्थापित हो गया है। इस दौरान ब्राज़ील, चीन, भारत, और अमेरिका दुनिया के सबसे बड़े तम्बाकू उत्पादक रहे हैं, पर अमेरिका में उत्पादन में उल्लेखनीय कमी आई है, जिससे ब्राज़ील, चीन, और भारत की प्रमुख उभरती हुई अर्थव्यवस्थाओं को अविनिर्मित तम्बाकू उत्पादन में बड़े खिलाड़ी बनने का अवसर मिला है। सामूहिक रूप से, ये तीन देश अब दुनिया में तंबाकू की पत्ती की आपूर्ति का लगभग दो-तिहाई उत्पादन करते हैं।

मज़े की बात यह है कि, रिपोर्ट संकेत देती है कि उत्पादन के ये क्षेत्रीय विस्थापन तम्बाकू के वैश्विक प्रवाह में प्रतिबिंबित हो रहे हैं: ब्राज़ील, चीन, और भारत अब अविनिर्मित तम्बाकू के निर्यात में अब एक अतिकाय भूमिका निभाते हैं। देश-स्तरीय विश्लेषण भी यह स्पष्ट करता है कि जहां ब्राज़ील अपने उत्पादन के अधिकांश का निर्यात कर देता है, वहीं चीन और भारत ऐसा नहीं करते हैं। इस निष्कर्ष से यह संकेत मिलता है कि चीन और भारत ने तम्बाकू मूल्य शृंखला–जिसमें कच्ची तम्बाकू पत्ती से सिगरेट जैसे उत्पाद बनाने की क्षमता शामिल है–का एक उल्लेखनीय अंश कब्ज़ा लिया है, जिससे उनके विशाल घरेलू उपभोक्ता आधारों की मांगें पूरी होने की संभावना है। साथ ही, ब्राज़ील और चीन के बीच व्यापार भी बढ़ रहा है, जो शायद आने वाले वर्षों में निम्न- और मध्यम-आय देशों के बीच तम्बाकू व्यापार के बढ़ने का सूचक है।

इसके विपरीत, उत्तरी अमेरिका और यूरोप के उच्च-आय देश आमतौर पर अविनिर्मित तम्बाकू के शीर्ष आयातक रहे हैं। विशेषकर, बेल्जियम-लक्ज़मबर्ग ने अविनिर्मित तम्बाकू आयात के शीर्ष आयातक का और छठवें सबसे बड़े निर्यातक का स्थान पाया है। इस बढ़त के पीछे के प्रेरक बलों के जटिल होने की संभावना है, जिनमें एंटवर्प बंदरगाह के रणनीतिक आकर्षण से लेकर यूरोपीय संघ के गठन के बाद विकसित हुईं पारगमन सुविधाएं तक शामिल हैं।

तम्बाकू नियंत्रण प्रयासों के लिए ऐसे रुझानों के महत्वपूर्ण निहितार्थ होते हैं। उदाहरण के लिए, वे तम्बाकू नियंत्रण प्रोत्साहनों में उच्च-आय देशों और निम्न- व मध्यम-आय देशों के बीच चौड़ी होती खाई का संकेत देते हैं। अब जबकि उच्च-आय देशों में तम्बाकू का उत्पादन और निर्यात कमज़ोर पड़ रहा है, तो धीरे-धीरे केवल धूम्रपान का स्वास्थ्य-बोझ ही उन सरकारों का एकमात्र तम्बाकू-संबंधी एजेंडा बनता जा रहा है। इसके विपरीत, चूंकि निम्न- और मध्यम-आय देशों में तम्बाकू का उत्पादन और निर्यात बढ़ रहा है, तो संभव है कि धूम्रपान से स्वास्थ्य पर पड़ने वाले दुष्प्रभावों से उत्पन्न नकारात्मक आर्थिक बाह्यताएं, तम्बाकू के उत्पादन और विनिर्माण से मिलने वाले आर्थिक लाभों से प्रति-संतुलित हो रही हों। यहां एक सुसंगत और प्रेरक नीतिगत प्रतिक्रिया की आवश्यकता है जो देशों को तम्बाकू उत्पादन, विनिर्माण, और उपभोग से दूर धकेले भी और खींचे भी। सबसे महत्वपूर्ण बात, वैश्विक तम्बाकू व्यापार के संचलन बलों की अतिरिक्त जानकारी आवश्यक है। भावी शोध के क्षेत्र ये हो सकते हैं: विनिर्मित तम्बाकू का संचलन, पत्ती के प्रकार के अनुसार तम्बाकू उत्पादन का विस्तृत विवरण और संबंधित पूर्वानुमान, और तम्बाकू नियंत्रण प्रयासों के लिए उनके निहितार्थ।

वर्डप्रेस ऐप्लायंस - संचालक टर्नकी लिनक्स

Powered by