“मलावी संकल्प” पर एक बार फिर नज़र - धूम्रपान-मुक्त दुनिया फाउंडेशन

“मलावी संकल्प” पर एक बार फिर नज़र

1980 के दशक के आखिरी वर्षों में विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) वैश्विक तम्बाकू नियंत्रण पर ध्यान देने के प्रयासों को बढ़ाना शुरू कर चुका था। डब्ल्यूएचओ के सदस्य देशों द्वारा 1987 में विश्व तम्बाकू निषेध दिवस की रचना की गई, जबकि विश्व स्वास्थ्य सभा (डब्ल्यूएचए) ने डब्ल्यूएचए40.38 संकल्प पारित किया जिसमें 7 अप्रैल 1988 को, “विश्व तम्बाकू निषेध दिवस” कहे जाने की मांग की गई थी। यह वो पहला मौका था जो तबसे, 1989 में संकल्प डब्ल्यूएचए42.19 पारित होने के बाद से हर वर्ष 31 मई को विश्व तम्बाकू निषेध दिवस के रूप में मनाया जाता है। जब ये “तम्बाकू या स्वास्थ्य” संकल्प स्वास्थ्य पर तम्बाकू के हानिकारक प्रभावों के बारे में जागरुकता फैलाने के लिए पारित किए गए थे तब, तम्बाकू के कारण हर वर्ष 20 लाख से अधिक लोगों की असमय मौत होती थी। तब से, यह आंकड़ा बढ़कर हर वर्ष 70 लाख से अधिक मौतों का हो गया है।

स्रोत: Fraym. मलावी के वर्तमान तम्बाकू कृषि परिदृश्य में चौथे एकीकृत घरेलू सर्वेक्षण की अंतर्दृष्टियां मानचित्र, क्षेत्र में तम्बाकू की कृषि हो रही होने की अनुमानित संभावना दर्शाता है। तम्बाकू की कृषि की 60 प्रतिशत से कम संभावना वाले क्षेत्रों को धूसर (ग्रे) रंग से; और जलराशियों को नीले रंग से दर्शाया गया है।

ऐसी तम्बाकू कंपनियों, जिनके तब कोई नाम भी नहीं जानता था, ने मलावी के स्वास्थ्य मंत्रालय में स्वास्थ्य सेवाओं के प्रमुख, Heatherwick Ntaba के साथ सहकार्य आरंभ कर दिया। Ntaba 1988 और 1989 में डब्ल्यूएचए के प्रतिनिधि, और डब्ल्यूएचओ के कार्यकारी मंडल के सदस्य थे। मिनेसोटा कोर्ट केस (1998) के बाद सबके सामने आए Philip Morris दस्तावेज़ बताते हैं कि Ntaba के साथ इस बारे में एक चर्चा हुई थी कि कैसे “डब्ल्यूएचओ की नीति तम्बाकू के उपयोग से जुड़े ‘स्वास्थ्य जोख़िम’ को हटाकर उसके स्थान पर एक अधिक आसन्न एवं नाटकीय जोख़िम: ‘अर्थव्यवस्था को जोख़िम’ को रख देगी, जिससे मलावी जैसे देश की अर्थव्यवस्था तबाह हो जाएगी।”

Ntaba ने 1988 में डब्ल्यूएचए को अपने 41वें संबोधन में कहा था, “डब्ल्यूएचओ के पास अपने तम्बाकू-रोधी अभियान का पूरी तरह कायाकल्प करने का नैतिक साहस और दूरदृष्टि होने चाहिए।” 4 वर्ष बाद 1992 में, तम्बाकू कंपनियों ने पैंतालीसवीं डब्ल्यूएचए बैठक में एक संकल्प (डब्ल्यूएचए45.20) को अपनाए जाने की तारीफ में तालियां बजाईं जिसमें तम्बाकू नियंत्रण उपायों से मिलने वाले स्वास्थ्य संबंधी लाभों के साथ-साथ, इन उपायों के आर्थिक प्रभावों को भी विचार में लेने की मांग की गई थी। संकल्प डब्ल्यूएचए45.20 को तम्बाकू कंपनियों द्वारा “मलावी संकल्प” नाम दिया गया। 1992 में, मलावी की कृषि आय का 73.0% तम्बाकू से आता था, और देश के सवेतन रोज़गार का लगभग एक-तिहाई भाग तम्बाकू उद्योग से मिलता था।

मलावी संकल्प में “तम्बाकू उत्पादक देशों, विशेष रूप से आय के प्रमुख स्रोत के रूप में तम्बाकू पर निर्भर देशों की अर्थव्यवस्था पर तम्बाकू उत्पादन के प्रभाव” का आकलन करने की मांग की गई थी। संकल्प डब्ल्यूएचए45.20 ने निर्दिष्ट किया कि सभी तम्बाकू संबंधी मुद्दों की केंद्रीय संयुक्त राष्ट्र संघ (यूएन) निगरानी यूएन व्यापार एवं विकास सम्मेलन (यूएनसीटीएडी) द्वारा की जाएगी जो यूएन आर्थिक व सामाजिक परिषद (ईसीओएसओसी) के अधीन आता है। संकल्प ने ईसीओएसओसी से तम्बाकू संबंधी मुद्दों पर ध्यान देने के लिए विभिन्न यूएन एजेंसियों, जिनमें डब्ल्यूएचओ शामिल है, के बीच सहकार्य के समन्वयन की मांग रखी। डब्ल्यूएचओ ने कहा कि “तम्बाकू उद्योग के दस्तावेज़ों से प्राप्त साक्ष्यों से यह बात उजागर होती है कि तम्बाकू कंपनियों ने कई वर्षों से तम्बाकू के उपयोग पर नियंत्रण करने के डब्ल्यूएचओ के प्रयासों को भ्रष्ट करने के सुविचारित प्रयोजन के साथ … प्रचालन किया है।” उस समय तम्बाकू कंपनियों ने यह माना कि मलावी संकल्प के परिणाम तम्बाकू नियंत्रण की मांगों की राह में एक बाधा सिद्ध होंगे।

2000 रिपोर्ट – डब्ल्यूएचओ में तम्बाकू नियंत्रण गतिविधियों को खोखला करने के लिए तम्बाकू कंपनियों की रणनीतियां – को अधिकृत करने के पीछे तम्बाकू उद्योग, और मिलीभगत में शामिल सरकारों और विद्वानों को यह चेतावनी देना था कि उनके कृत्य अस्वीकार्य हैं। तम्बाकू कंपनियों ने यह आशा की थी (जो सही निकली) कि यूएनसीटीएडी तम्बाकू नियंत्रण के लिए अविलंब कार्रवाई को प्रेरित नहीं करेगा।

पहली वैश्विक सार्वजनिक स्वास्थ्य संधि, डब्ल्यूएचओ तम्बाकू नियंत्रण फ्रेमवर्क सम्मेलन (एफसीटीसी) पर जब हमने समझौता वार्ताएं शुरू कीं, तो मेरे सबसे पहले कार्यों में से एक यह था कि तम्बाकू निगरानी का नियंत्रण यूएनसीटीएडी से छीनकर डब्ल्यूएचओ को दिया जाए। डब्ल्यूएचओ के तत्वाधान में एफसीटीसी की समझौता वार्ता को तम्बाकू कंपनियों या मिलीभगत में शामिल किसी अन्य इकाई/संस्था के अनुचित प्रभाव के लिए खोखला नहीं बनाया जाना था। सफल समझौता वार्ताओं के परिणामस्वरूप डब्ल्यूएचओ एफसीटीसी संधि का विकास हुआसम्मेलन 27 फरवरी 2005 को प्रभावी हुआ, और उस समय 40 सदस्य राज्यों ने उसका अनुमोदन किया था।

अब आते हैं आज पर। इस समय, सम्मेलन में 181 पक्ष प्रतिभागी हैं।

30 वर्ष पहले दिया गया यह तर्क कि डब्ल्यूएचओ और सरकारों द्वारा उठाए गए कदमों के फलस्वरूप तम्बाकू के पत्ते की मांग तेज़ी से गिरेगी, उस समय मान्य नहीं था। 1999 में, तम्बाकू नियंत्रण की आर्थिकी के बारे में विश्व बैंक की रिपोर्ट, महामारी पर अंकुश, ने ऐसे समय जब तम्बाकू की वैश्विक मांग इतनी अधिक बनी हुई थी और डब्ल्यूएचओ के प्रयासों के बावजूद अगले कई दशकों तक इस मांग के अधिक बने रहने की संभावना थी, तब आपूर्ति की ओर के मुद्दों (जैसे तम्बाकू विविधीकरण) पर ध्यान देने की निर्रथकता को रेखांकित किया था। विकासशील देशों के तम्बाकू किसानों की आवश्यकताओं पर ध्यान देने के लिए कोई भी प्रमुख वित्तपोषण पहल विकसित नहीं की गई है, हालांकि कई सुवित्तपोषित कार्यक्रमों ने कनाडाई और अमेरिकी तम्बाकू किसानों को तम्बाकू छोड़कर वैकल्पिक आजीविकाएं अपनाने में मदद दी है।

एफसीटीसी के मार्गदर्शक सिद्धांतों में किसानों की आवश्यकताओं पर ध्यान देने वाला प्रावधान शामिल है:

“विकासशील प्रतिभागी देशों, और परिवर्तनकाल से गुजर रहीं अर्थव्यवस्थाओं वाले प्रतिभागी देशों में तम्बाकू नियंत्रण कार्यक्रमों के फलस्वरूप जिन तम्बाकू किसानों और कर्मियों की आजीविकाएं गंभीर रूप से प्रभावित हुई हैं उनके आर्थिक परिवर्तन में सहायता करने के लिए तकनीकी और वित्तीय सहायता के महत्व को मान्यता दी जानी चाहिए और उस पर संधारणीय विकास के लिए राष्ट्रीय स्तर पर विकसित की गईं रणनीतियों के संदर्भ में ध्यान देना चाहिए।”

यह अनुशंसा 1992 के मलावी संकल्प की भावना दोहराती है, पर इसका वित्तपोषण होना अभी-भी बाकी है। पिछले तीन दशकों के दौरान, और विशेष रूप से पिछले दशक में, छोटी जोत के किसानों (प्रायः महिलाओं) की आवश्यकताएं कई कारणों से बढ़ गई हैं।

मलावी जैसे देशों, जो तम्बाकू निर्यातों पर निर्भर हो चुके हैं, ने देखा है कि कैसे यह निर्भरता, बदतर आर्थिक वृद्धि, धीमे विकास, श्रम आवश्यकता में वृद्धि, और ख़राब स्वास्थ्य को जन्म देती है। जब डब्ल्यूएचए45.20 पारित हुआ था तब मलावी में निर्यात आमदनी का 70% से अधिक भाग तम्बाकू से आता था, और तम्बाकू कंपनियां इस देश को अफ्रीकी तम्बाकू के दो सोने के शहरों में से एक मानती थीं, दूसरा था ज़िम्बाब्वे, जिसकी निर्यात आमदनी का 25% से अधिक भाग तम्बाकू से आता था। आज 27 वर्ष बाद मलावी के कुल निर्यात में तम्बाकू का 55% हिस्सा है।

हालांकि, तम्बाकू के पत्ते की मांग अंततः घट रही है जिसके कारण अग्रलिखित हैं: (1) दुनिया भर में डब्ल्यूएचओ के नेतृत्व में लागू किए जा रहे तम्बाकू नियंत्रण विनियम, (2) डब्ल्यूएचओ-नीत विनियमों के कार्यान्वयन को ब्लूमबर्ग का वित्तीय सहयोग, और (3) तम्बाकू एवं ई-सिगरेट कंपनियों का रूपांतरण, चूंकि वे तम्बाकू हानि न्यूनकारी उत्पादों को अपना रही हैं जिनमें तम्बाकू की आवश्यकता कम होती है। तम्बाकू हानि न्यूनकारी उत्पादों की ओर हो रहा विस्थापन जापान, कोरिया, अमेरिका, यूनाइटेड किंगडम, आर्थिक सहकारिता एवं विकास संगठन (ओईसीडी) के कई सदस्य देशों, रूस, और यहां तक कि कुछ विकासशील देशों में भी सबसे स्पष्ट है। ऐसे बदलाव तम्बाकू पर निर्भर अर्थव्यवस्था वाले देशों, जैसे मलावी, में अपरिहार्य रूप से अपने परिणाम लाएंगे।

जब हमने धूम्रपान-मुक्त दुनिया फाउंडेशन (फाउंडेशन) की स्थापना की थी, तब यह स्पष्ट हो गया कि छोटी जोत के तम्बाकू किसानों, विशेष रूप से अफ्रीका के किसानों, की आवश्यकताएं राष्ट्रीय विकास के लिए सर्वोपरि महत्व रखती हैं, क्योंकि तम्बाकू की मांग लगातार घट रही है और एफसीटीसी उपाय लागू करने की दिशा में दुनिया भर के देशों द्वारा की जा रही प्रगति ने धूम्रपान के ख़ात्मे को एक वास्तविकतावादी लक्ष्य बना दिया है।

तम्बाकू की मांग में लगातार गिरावट वाले भविष्य हेतु किसानों को बेहतर ढंग से तैयार करने, और उनके देशों की अर्थव्यवस्थाओं को मजबूती देने में मदद के लिए, फाउंडेशन में हमने कृषि रूपांतरण को हमारे कार्य के एक महत्वपूर्ण स्तंभ के रूप में एकीकृत किया है। कृषि रूपांतरण पहल (एटीआई) इस बात को मान्यता देती है कि मलावी अद्वितीय रूप से चुनौतीपूर्ण आवश्यकताओं वाला देश है क्योंकि यह दुनिया का सबसे अधिक तम्बाकू-निर्भर देश है। अतः मलावी, कृषि क्षेत्र में हमारा कार्य आरंभ करने के लिए एक स्वाभाविक स्थान है।

फसल विविधीकरण के विषय को दशकों पहले 1994 में ज़िम्बाब्वे के हरारे में आयोजित तम्बाकू नियंत्रण सम्मेलन में उठाया गया था। अफ्रीका के अंतरराष्ट्रीय तम्बाकू किसान संघ के अध्यक्ष Henry Ntaba ने उस समय स्वयं को “पहले एक किसान, बाद में एक तम्बाकू किसान” बताया था। क्या यह वाक्य दुनिया भर के तम्बाकू किसानों के लिए एक प्रेरणा बन सकता है? हमारी निश्चय ही यह आशा है कि ऐसा होगा, और हम यह सुनिश्चित करेंगे कि हमारे प्रयासों से किसानों और उनकी अर्थव्यवस्थाओं को फलने-फूलने में मदद मिलेगी। हमारा एटीआई कार्यालय अब संचालन शुरू कर चुका है, और इस दिशा में कार्य चल रहा है!

यह ब्लॉग काफी हद तक तम्बाकू उद्योग के दस्तावेज़ों के विशेषज्ञों की समिति की 2000 की रिपोर्ट पर आधारित हैउस समय Derek Yach ने डब्ल्यूएचओ की तम्बाकू मुक्त पहल का नेतृत्व किया था और अपनी टीम, जिसमें Chitra Subramanian और Douglas Bettcher शामिल थे, के साथ मिलकर एफसीटीसी प्रक्रिया के शुरू होने पर रिपोर्ट के व्यापक प्रचार-प्रसार को सुगम बनाया था।

वर्डप्रेस ऐप्लायंस - संचालक टर्नकी लिनक्स

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