भारत में धूम्रपान की स्थिति - धूम्रपान-मुक्त दुनिया फाउंडेशन

… में धूम्रपान की स्थिति

भारत

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WHO एफसीटीसी

भारत संख्याओं के अनुसार धूम्रपान

धूम्रपान में कमी

2000 में, 33.8% पुरुष और 5.7% महिलाएँ धूम्रपान करती थीं। 2010 तक, 23.5% पुरुष और 2.5% महिलाएँ धूम्रपान कर रही थीं। वर्तमान में, धूम्रपान की दरें कम होकर 14.0% तक आ गई हैं।

तम्बाकू के प्रकार

तम्बाकू का सबसे आम प्रकार है डिब्बाबंद सिगरेट जिसका हिस्सा 81% है, इसके बाद आती है हाथ से रोल की हुई सिगरेट, और फिर सिगारिलो।

तम्बाकू से होने वाली मौतें

तम्बाकू से संबंधित मौतों की संख्या 1990 से 2017 के बीच घटकर 106 से 89 प्रति 100,000 हो गई है। जिसमें पुरुषों की संख्या घटकर 158 से 134 और महिलाओं की संख्या 53 से 43 हो गई है।

महिलाओं में स्तन बनाम फेफड़े का कैंसर (मौतें, 2017)

स्तन: 1.68%, फेफड़ा: 0.52%

मीडिया डायलॉग

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धूम्रपान, भारत की संस्कृति में रचा-बसा हुआ है, परंपराओं, दोस्ती की भाव-भंगिमाओं और धर्म में गुंथा हुआ है। इस रूप में, स्वास्थ्य के लिए धूम्रपान के ख़तरों पर, और धूम्रपान छोड़ने की विधियों या उसके विकल्पों पर जनता में कोई ख़ास संवाद नहीं होता है।

“मैं उन लोगों से, जिन्हें इसकी लत नहीं है, जिन्होंने शुरू नहीं किया है, कहना चाहता हूँ कि अगर आप धूम्रपान करने लगते हैं, तो फिर इसे छोड़ना सचमुच कठिन होता है।” – अमित माझी, एक धूम्रपान करने वाला व्यक्ति जो अब छोड़ने के लिए संघर्षरत है

– Amit Majhi, एक धूम्रपानकर्ता जो इसे छोड़ने के लिए संघर्ष कर रहे हैं

सार्वजनिक धूम्रपान

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निर्दिष्ट धूम्रपान क्षेत्रों वाले विमानस्थलों और कतिपय क्षमता वाले होटलों और रेस्टोरेंटों के सिवाय, सभी सार्वजनिक स्थान।

बिक्री के स्थान पर डिस्प्ले

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विज्ञापन पर प्रतिबंध। 

ब्रांडेड पैक

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2016 की स्थिति में, भारत ने सिगरेट पैकेजिंग के 85 प्रतिशत भाग को कवर करने वाली सचित्र चेतावनियाँ लागू कर दी थीं।

रवैये और धारणाएँ

सिगरेट की तुलना में ई-सिगरेट कितनी हानिकारक है?

वैपिंग डिवाइसों के सापेक्ष नुकसान की धारणा। फाउंडेशन के 2017 और 2019 के वैश्विक मतदानों से, प्रतिभागियों से पूछा गया, "क्या आपको लगता है कि ई-सिगरेट पीना और वैपिंग डिवाइस नियमित सिगरेट पीने की तुलना में कम या ज्यादा हानिकारक हैं?"

*2017 वैश्विक मतदान से डेटा

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55.0% भारतीय तम्बाकू उत्पाद उपयोगकर्ताओं का मानना है कि ई-सिगरेट और एनआरटी जैसे पैच या ग़म में मौजूद निकोटीन से कैंसर होता है (2019 वैश्विक मतदान)

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भारत में, 51.9% निकोटीन और तंबाकू उपयोगकर्ताओं को लगता है कि उनके तम्बाकू सेवन (2019 ग्लोबल पोल) को छोड़ना बहुत मुश्किल होगा

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भारत में, 61.9% निकोटीन और तम्बाकू उत्पाद उपयोगकर्ताओं का मानना है कि पैकेजों पर स्वास्थ्य चेतावनियाँ अतिरंजित हैं (2019 वैश्विक मतदान)

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82.1% धुआँ रहित तम्बाकू के उपयोगकर्ताओं और धुआँ रहित तम्बाकू उत्पादों से अवगत लोगों को चिंता है कि धुआँ रहित तम्बाकू उत्पादों का सेवन भविष्य में उनके स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचाएगा (2019 वैश्विक मतदान)

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68.7% भारतीय उत्पाद उपयोगकर्ताओं का मानना है कि तम्बाकू से संबंधित कैंसर मुख्य रूप से निकोटीन के कारण होता है (2019 वैश्विक मतदान)

क्या आपने कभी सिगरेट पर वह पैसा खर्च किया है जिसे आप जानते थे कि भोजन जैसी घरेलू आवश्यक चीजों पर खर्च करना बेहतर था?

क्या तम्बाकू की कीमत में वृद्धि का आपके वर्तमान धूम्रपान की आदत पर प्रभाव पड़ेगा?

वर्डप्रेस ऐप्लायंस - संचालक टर्नकी लिनक्स

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