भारत में तम्बाकू की महामारी - धूम्रपान-मुक्त दुनिया फाउंडेशन

भारत में तम्बाकू महामारी

भारत के तम्बाकू के उपयोग की जटिलताओं और प्रभावों पर कार्रवाई ज़रूरी है

भारत में चीन के बाद दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी तम्बाकू का उपयोग करने वाली आबादी है। भारत में तम्बाकू का परितंत्र जटिल है। इस लेख में, हम (1) तम्बाकू उत्पादों, (2) स्वास्थ्य प्रभावों, (3) आर्थिक निहितार्थों की जांच करते हैं, और हम भारत में आगे बढ़ने के लिए इनपुट और विचारों की माँग करके समाप्त करेंगे।

सबसे पहले, भारत में तम्बाकू उत्पादों के तीन सामान्य समूह हैं: बीड़ी, धुआँ रहित तम्बाकू उत्पाद, और पारंपरिक सिगरेट। बीड़ियाँ सस्ती, छोटी, हाथ से रोल की जाने वाली वाली सिगरेटें हैं जो भारत में पारंपरिक सिगरेट की तुलना में बहुत अधिक आम हैं। बीड़ी में तेंदू या तेंबुर्नी के पत्ते में तम्बाकू को लपेटा जाता है। हमारा अनुमान है कि 2017 के दौरान भारत में सिगरेट स्टिकों की खपत की कुल मात्रा में बीड़ियों का अनुपात 80% से अधिक था। धुआँ रहित तम्बाकू के उपयोग का बहुत प्रचलन है, जिसमें दोहरे उपयोग के ध्यान देने योग्य अनुपात का योगदान होता है।धुआँ रहित तम्बाकू उत्पाद, जैसे गुटखा और पान मसाला, छोटे-छोटे पाउचों में आधे रुपये ($0.01 से कम) जितनी कम कीमत में उपलब्ध हैं। पिछले कई वर्षों के दौरान भारत में धुआँ रहित तम्बाकू की खुदरा बिक्री में भारी गिरावट आई है, क्योंकि कई राज्यों ने गुटखा और इसके विभिन्न प्रकारों की बिक्री, निर्माण, वितरण और भंडारण पर प्रतिबंध लगा दिया है। मई 2013 की स्थिति में, गुटखा पर 24 राज्यों और 3 केंद्र शासित प्रदेशों में प्रतिबंध लगा दिया गया था। इसके बावजूद, यह उत्पाद और इसके जैसे उत्पाद व्यापक रूप से उपलब्ध हैं।

भारत के लिए वैश्विक वयस्क तम्बाकू सर्वेक्षण (GATS) 2016-2017 के अनुसार, कुल 28.6% (266.8 मिलियन) वयस्क (42.4% पुरुष और 14.2% महिलाएं) वर्तमान में धूम्रपान और/या धुआँ रहित तम्बाकू उत्पादों का उपयोग करते हैं। GATS का अनुमान है कि वर्तमान में 99.5 मिलियन वयस्क तम्बाकू का धूम्रपान करते हैं; और 199.4 मिलियन वयस्क धुआँ रहित तम्बाकू का उपयोग करते हैं। 2018 तक केवल अनुमानित 100,000 से 150,000 वैपरों के साथ, भारत में ई-सिगरेट का बाजार अविकसित है।

देश में ज्ञान अंतराल और जोखिम की भ्रांतियां अपेक्षाकृत अधिक हैं। उदाहरण के लिए, भारत ने फाउंडेशन के विश्व भर में धूम्रपान की स्थिति सर्वेक्षण में मतदान करने वाले 13 देशों में धूम्रपान के जोखिमों की अनुभूति पर सबसे निम्न स्थान प्राप्त किया (तालिका 1 देखें)।

तालिका 1. विश्व भर में धूम्रपान की स्थिति सर्वेक्षण - भारत बनाम कुल के लिए चुने गए परिणामों की तुलना

प्रश्न आधार भारत कुल भारत बनाम कुल
क्या धूम्रपान स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है? धूम्रपान करने वाले 69.3% 86.4% (17.1%)
क्या धूम्रपान से फेफड़े का कैंसर होता है? सभी 69.6% 80.8% (11.2%)
क्या आपको धूम्रपान और स्वास्थ्य पर प्रभाव के बारे अच्छी जानकारी है? धूम्रपान करने वाले 68.2% 88.2% (20.0%)
क्या आपने कभी खाने के बजाय सिगरेट पर पैसा खर्च किया है? धूम्रपान करने वाले और पूर्व काल में धूम्रपान करने वाले 60.2% 43.7% 16.5%

स्रोत: धूम्रपान की स्थिति सर्वेक्षण 2018

दूसरे, भारत में तम्बाकू उत्पादों के व्यापक उपयोग के परिणामस्वरूप स्वास्थ्य के लिए निहितार्थ विशाल हैं। WHO के अनुसार, भारत में हर वर्ष 1 मिलियन से अधिक लोग तम्बाकू के कारण मरते हैं, जो सभी मौतों का 9.5% है। मरने वालों की संख्या बढ़ रही है, क्योंकि भारत में 2018 में तम्बाकू से संबंधित मौतों की संख्या करीबन 1 मिलियन थी जबकि 2010 में लगभग 930,000 वयस्कों की मौत हुई थी। तम्बाकू से होने वाली मौत का सबसे आम कारण हृदय रोग है जो तम्बाकू से संबंधित मौतों का 48% है। 2017 की स्थिति में भारत में मृत्यु और विकलांगता को सबसे अधिक बढ़ावा देने वाले जोखिम कारकों में तम्बाकू का, कुपोषण, आहार संबंधी जोखिमों, वायु प्रदूषण, और उच्च रक्तचाप के बाद, पाँचवा स्थान था।

छह WHO क्षेत्रों में से चार में किए गए 37 अध्ययनों की समीक्षा में पाया गया कि धुआँ रहित तम्बाकू उत्पादों (एसएलटी) के उपयोग ने मौखिक कैंसर के खतरे को उल्लेखनीय रूप से बढ़ा दिया है। विभिन्न धुआँ रहित तम्बाकू उत्पादों के विश्लेषण से जोखिम के अनेक स्तरों का पता चला। एक मुख्य निष्कर्ष था गुटखा (OR 8.67; 95% CI, 3.59 – 20.93) और पान के तम्बाकू/सुपारी के तरल ((OR 7.18; 95% CI, 5.48 - 9.41) के लिए अपेक्षाकृत उच्च संभावना अनुपात (ORs) का होना, जो दर्शाता है कि गुटखा और पान के उपयोग से मुंह के कैंसर का खतरा उनका उपयोग न करने की तुलना में लगभग सात से आठ गुना तक बढ़ सकता है। व्यवस्थित वैश्विक समीक्षा में एक अलग निष्कर्ष पाया गया कि स्नस (OR 0.86; 95% CI, 0.58 - 1.29), जो स्कैंडिनेविया में आम तौर पर उपयोग की जाने वाली एक प्रकार की नम धुआँ रहित तम्बाकू है, से लगभग 1 के OR के साथ, इस तरह का कोई बढ़ा हुआ जोखिम प्रदर्शित नहीं किया गया। समीक्षा के निहितार्थ यह हैं कि संभावित रूप से कम हानिकारक उत्पाद जैसे स्वीडिश स्नस का उपयोग करके धुआँ रहित तम्बाकू उत्पादों के उपयोग से जुड़ी विकलांगता और अकाल मृत्यु तथा मौखिक कैंसर के जोखिम को उल्लेखनीय रूप से कम किया जा सकता है।

भारत में कैंसर के 30% से 40% मामले मौखिक कैंसर के कारण होते हैं। लिंग के अनुसार देखने पर पाया गया है कि धुआँ रहित तम्बाकू का उपयोग महिलाओं को आनुपातिक रूप से अधिक प्रभावित करता है। भारत में महिलाओं द्वारा धूम्रपान अभी भी सामाजिक रूप से अस्वीकार्य है लेकिनधुआँ रहित तम्बाकू (एसएलटी) का उपयोग अधिक आम है। GATS के अनुसार 2016-2017 में, 12.8% महिलाएं धुआँ रहित तम्बाकू की वर्तमान उपयोगकर्ता थीं, जिसकी तुलना में 2.0% महिलाएं वर्तमान में तम्बाकू का धूम्रपान करती हैं और 14.2% महिलाएं वर्तमान में एक और/या दूसरे उत्पाद का उपयोग करती हैं। जटिलता को और बढ़ाते हुए, तम्बाकू के उपयोग से क्षयरोग (टीबी) की बीमारी और मृत्यु का जोखिम बहुत बढ़ जाता है। 2017 में, टीबी के 87% नए मामले भारत सहित टीबी के अधिक बोझ वाले 30 देशों में हुए।

तीसरे, तम्बाकू का अर्थशास्त्र जटिल है। सामान्य सिगरेट की तुलना में बीड़ी पर पारंपरिक रूप से या तो बहुत कम दर से कर लगाया जाता है या वह कराधान से पूरी तरह से बच जाती है। नतीजतन, बीड़ी सस्ती और व्यापक रूप से उपलब्ध है। बीड़ी का उत्पादन आम तौर पर ग्रामीण महिलाओं के घरों में विकेंद्रीकृत तरीके से किया जाता है। अनुसंधान इंगित करता है कि भारत में सिगरेट का धूम्रपान धीरे-धीरे बीड़ी के धूम्रपान को विस्थापित कर रहा है। उदाहरण के लिए, 1998 से 2015 की अवधि के दौरान, 15 से 69 वर्ष के बीच के पुरुषों में सिगरेट पीने का प्रचलन दुगुना हो गया। फिर भी, बीड़ी प्रमुख उत्पाद बना हुआ है। देश में सिगरेट की पैकेजिंग के 85% भाग पर चित्रात्मक चेतावनी को तम्बाकू नियंत्रण के लिए एक जीत माना जाता था, लेकिन सिंगल सिगरेट की बिक्री और उपयोग तथा अवैध व्यापार की उच्च मात्रा प्रभाव को सीमित करते हैं। दूसरी ओर, खुली सिगरेट की बिक्री पर प्रतिबंध, जो अब कुछ भारतीय राज्यों में लागू है, इस श्रेणी को संगठित खुदरा बिक्री की ओर धकेल रहा है। गुटखा और सिगरेट की बिक्री पर प्रतिबंध के बारे में कहें तो, किताबों में मौजूद कानून कमजोर नियामक प्रवर्तन क्षमता वाले देशों में, या जहाँ राष्ट्रीय कानूनों में वैश्विक मानदंडों को गंभीरता से नहीं लिया जाता है, वहाँ लागू नहीं किए जा सकते हैं।

भारत में तम्बाकू के उपयोग से जुड़े अर्थशास्त्र के कई पहलुओं का सारांश तालिका 2 में प्रदर्शित है। भारत के स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय का अनुमान है कि तम्बाकू के उपयोग के कारण होने वाली बीमारियों की कुल प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष लागत 2011 में 1,045 अरब रुपये (मौजूदा विनिमय दरों पर $14.6 अरब) थी, जिसमें से मृत्यु की अप्रत्यक्ष लागत 84% थी। मंत्रालय का अनुमान है कि धूम्रपान रहित तम्बाकू (कुल का 78%) की कीमत धूम्रपान रहित तम्बाकू के उपयोग (कुल का 22%) की कीमत से बहुत अधिक थी। बीड़ी बनाम कारखाने में निर्मित सिगरेट (फ़ैक्ट्री-मेड सिगरेट - एफएमसी) की लागतों का अनुमान नहीं लगाया गया था, हालांकि हम एक मात्रा या स्टिक के आधार पर अनुमान लगाते हैं कि सेवन की गई बीड़ी का एफएमसी के साथ अनुपात 4:1 से अधिक है।

एक अलग अध्ययन में पाया गया है कि 2017 में बीड़ी पीने की कुल वार्षिक आर्थिक लागत भारत के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की लगभग 0.5% थी, जबकि बीड़ी से मिलने वाली उत्पाद शुल्क की आय उसकी आर्थिक लागत का केवल 0.5% थी। भारत में धूम्रपान के व्यवहार की सामाजिक आर्थिक सच्चाई यह है कि खराब सामाजिक आर्थिक स्थिति वाले लोग बीड़ी पीते हैं, और इस प्रकार गरीबों को इससे संबंधित आर्थिक लागतों के एक असामान्य रूप से बड़े हिस्से का बोझ उठाना पड़ता है। कर संरचना के कारण, अनुसंधान में पाया गया है कि एफएमसी ने, अपेक्षाकृत कम प्रचलन के बावजूद, 2017-2018 में तम्बाकू से मिलने वाले कर का अधिकांश भाग चुकाया था, जबकि बीड़ी कम लागत वाला विकल्प बनी हुई है।

तालिका 2. भारत के लिए तम्बाकू के उपयोग के चुनिंदा आर्थिक आँकड़ों का सारांश

तम्बाकू का उपयोग
बीड़ी एफएमसी धूम्रपान धुआँ रहित कुल
वर्तमान उपयोगकर्ता (मिलियन)1 99.5 199.4 266.8
अनुमानित मात्रा - स्टिक (अरब)2 500 81 581
स्वास्थ्य लागत (अरब रुपए)3 811 234 1,045
स्वास्थ्य लागत (अरब अमेरिकी डॉलर)4 11.4 3.3 6.9
अनुमानित कर प्राप्तियाँ वित्तीय वर्ष 2017-18 (अरब रुपए)5 34 383 416 79 495
अनुमानित कर प्राप्तियाँ वित्तीय वर्ष 2017-18 (अरब अमेरिकी डॉलर)4 0.5 5.4 5.8 1.1 6.9
कुल कर बोझ (%)5 22.0% 52.8% 60%

स्रोत:

  1. वैश्विक वयस्क तम्बाकू सर्वेक्षण (जीएटीएस)।
  2. निकोटीन की वैश्विक प्रवृत्तियाँ रिपोर्ट।
  3. भारत में तम्बाकू से संबंधित बीमारियों का आर्थिक बोझ
  4. विदेशी विनिमय दर 0.014 अमेरिकी डॉलर में भारतीय रुपया 1 मई 2019 की स्थिति में।
  5. भारत में तम्बाकू उत्पादों पर जीएसटी का अनुमानित प्रभाव

फाउंडेशन समझता है कि कराधान एक महत्वपूर्ण लीवर है, जैसा कि स्वास्थ्य के लिए राजकोषीय नीति पर कार्य बल द्वारा अपनी हाल की रिपोर्ट में ज़ोर दिया गया है। हालांकि, हम मानते हैं कि रिकॉर्ड से पता चलता है कि विभिन्न प्रकार के उत्पादों पर उत्पाद शुल्क बढ़ाने के लिए सरकारों पर दबाव डालना धूम्रपान-मुक्त दुनिया को साकार करने के लिए पर्याप्त नहीं हैं। हमारा मानना है कि जब तक यथास्थिति बनाए रखने में भौतिक दिलचस्पी रखने वाले हितधारक उसके लिए काम करने के लिए प्रेरित बने रहेंगे, तब तक असली परिवर्तन असंभव है।

अधिक तात्कालिकता और कार्रवाई करने का समय

भारत में तम्बाकू के उपयोग के मानवीय और आर्थिक प्रभाव को देखते हुए, इस लेख में दर्शाई गई जटिलता के साथ, फाउंडेशन इस पीढ़ी में धूम्रपान को समाप्त करने के लिए दूसरों के साथ काम करने के लिए प्रतिबद्ध है। अगले कुछ महीनों के लिए, हम फाउंडेशन के लिए इष्टतम भूमिका के बारे में सुनेंगे, उसका अध्ययन करेंगे और उस पर चर्चा करेंगे, जो दशकों से चल रहे उल्लेखनीय काम की अनुपूरक है। हम नेताओं को अपनी रणनीतिक योजना का अध्ययन करने और संभावित प्रभाव और रुचि के क्षेत्रों का प्रस्ताव करने के लिए आमंत्रित करते हैं।

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